झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22 वा वार्षिक उत्सव माताजी आश्रम हाता में सम्पन्न।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार रविवार, 21 सितम्बर 2025 को महालया के शुभ अवसर पर माताजी आश्रम हाता में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22 वां वार्षिक उत्सव विविध कार्यक्रम के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22 वा वार्षिक उत्सव माताजी आश्रम हाता में सम्पन्न।
अभिजीत सेन।
जमशेदपुर/ पोटका
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार रविवार, 21 सितम्बर 2025 को महालया के शुभ अवसर पर माताजी आश्रम हाता में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद का 22 वां वार्षिक उत्सव विविध कार्यक्रम के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ।इस अबसर पर सुबह 9.30 बजे माँ दुर्गा की आगमनी गीत प्रस्तुत की गई जिसमें सुनील कुमार दे,कमल कांति घोष,रेवा गोस्वामी, तोड़ित मंडल,भास्कर दे,पतित पावन दास,प्रवीर दास आदि कलाकारों ने भाग लिया।।

सम्मेलन का उद्घाटन अतिथियों द्वारा धूप द्वीप प्रज्वलित करके तथा मां सरस्वती की प्रतिकृति पर माल्यार्पण करके किया गया। कमल कांति घोष के द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया तथा स्वागत हसन परिषद के सचिव शंकर चंद्र गोप ने दिया। एवं परिषद का उद्देश्य पर प्रकाश डाला। झारखंड प्रभा के संपादक सुनील कुमार दे ने झारखंड प्रभा की विशेषता पर प्रकाश डाला।उसके बाद अतिथियों द्वारा,साहित्य समाज का दर्पण,, इस विषय पर अपना अपना महत्वपूर्ण विचार रखे।
मुख्य अतिथि ने कहा,,,झारखंड प्रभा के माध्यम से झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद ने सभी भाषाओं का उचित सम्मान देने का काम कर रहा है जो आज के समय में काफी प्रासंगिक है।झारखंड प्रभा सचमुच भाषाई एकता का प्रतीक है। मौके पर उपस्थित डॉ अरविन्द कुमार लाल ने झारखंड साहित्य परिषद के पहल पर प्रशंसा करते हुए माताजी आश्रम के सभा कक्ष को सौंदर्यजीकरण करने हेतु सहयोग करने की घोषणा किए ।
पूर्व विधायक श्रीमती मेनका सरदार ने माताजी आश्रम एवं झारखंड साहित्य परिषद के क्रियाकलापों पर भूरी भूरी प्रशंसा की। इस अबसर पर बहुभाषी साहित्यिक पत्रिका झारखंड प्रभा का 17 का अंक का अतिथियों द्वारा विधिवत विमोचन किया गया।इसके अलावे साहित्यकार विकास कुमार भकत द्वारा लिखी गईं अंग्रेजी पुस्तक,आनफॉरगेटबुल मेमोरीज का भी विमोचन किया गया।साथ ही साथ सम्मेलन में परिषद कि ओर से शहीद निर्मल महतो विद्यापीठ महेशकुदर के प्रधान शिक्षक माणिक लाल महतो,घाटशिला के जाने माने साहित्यकार वीरेंद्र नाथ घोष एवं शंकरदा के दिव्यांग संगीत कलाकर तरणी कांत गोप को शाल,स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मेलन का दूसरा चरण बहुभाषी कवि सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ।इस अबसर पर जनमेजय सरदार,विकास कुमार भकत,करुणामय मंडल, जयहरि सिंह मुंडा,उज्वल कुमार मंडल,सनत मंडल आशुतोष मंडल,दुलाल चंद्र दास,निशित दास,बासंती सिंह सरदार,दिनेश सरदार,मृणाल पाल,चिंतामणि त्रिपाठी, स्वपन मंडल,स्वपन कुमार मंडल,शंकर चंद्र गोप,कृष्ण पद मंडल, अजित सरदार,मोनी पाल,सुधांशु मिश्र,बलराम गोप,अमल कुमार दास,नित्यानंद गोस्वामी, बीथिका मंडल,उत्पल चक्रवर्ती,अजित कुम्भकार, दुलाल मुखर्जी,मिथुन साहू,नारायण चटर्जी,तपन मंडल,सुदीप मुखर्जी,आनंद साहू के अलावे माताजी आश्रम के भक्तगण और झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद के सदस्यगन काफी संख्या में उपस्थित रहे।




