झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासी संग्राम! सत्ता पक्ष का भाजपा पर बड़ा आरोप- ‘आंदोलन हाइजैक कर बाहर से बुलाए उपद्रवी’
झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। रांची में विधानसभा घेराव के दौरान हुए उग्र प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव और हंगामे के बाद सत्ता पक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासी संग्राम! सत्ता पक्ष का भाजपा पर बड़ा आरोप- ‘आंदोलन हाइजैक कर बाहर से बुलाए उपद्रवी’
Ranchi Protest: झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। रांची में विधानसभा घेराव के दौरान हुए उग्र प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव और हंगामे के बाद सत्ता पक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दावा किया है कि छात्रों का आंदोलन शुरुआत में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भाजपा ने इसे अपने राजनीतिक हित के लिए कथित तौर पर हाइजैक कर लिया और प्रदर्शन को हिंसक रूप देने की कोशिश की।
विधानसभा घेराव के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव
रांची में झारखंड विधानसभा के बाहर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैदा हुए तनाव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर आमने-सामने ला दिया है। छात्रों के उग्र प्रदर्शन और हंगामे के बाद सरकार की ओर से भाजपा पर सीधे निशाना साधा गया। सत्ता पक्ष के नेताओं का आरोप है कि छात्रों की वास्तविक मांगों के समाधान के लिए सरकार बातचीत कर रही थी, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद आंदोलन का स्वरूप बदल गया।
मंत्री सुदिव्य कुमार ने विधानसभा में छात्रों के घेराव और उससे जुड़े घटनाक्रम पर सरकार का पक्ष रखते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल कुछ लोग छात्र नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े ऐसे कार्यकर्ता थे, जिन्होंने प्रदर्शन को उग्र बनाने का काम किया।
मंत्री सुदिव्य कुमार ने क्या कहा?
भाकपा माले विधायक अरूप चटर्जी के अनुरोध पर सदन में घटनाक्रम की जानकारी देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत की थी। उनके मुताबिक रविवार को छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता हुई थी और उनकी कई मांगों को स्वीकार करने की दिशा में सहमति बनी थी।
मंत्री ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने का मुद्दा अलग कानूनी स्थिति में है। उनका कहना था कि यह मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी से जुड़ा होने के कारण राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में सीधे तौर पर नहीं आता। सरकार के अनुसार, इस स्थिति के बावजूद भाजपा ने कथित तौर पर पीछे के रास्ते से छात्रों को भड़काने का प्रयास किया।
सुदिव्य कुमार ने आरोप लगाया कि छात्रों का आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया और इसके पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका रही।
झामुमो ने भाजपा पर लगाया ‘बाहरी लोगों’ को भेजने का आरोप
घटना को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए आरोप लगाया कि भाजपा को झारखंड के छात्रों का आंदोलन स्वीकार नहीं हो रहा है।
झामुमो का दावा है कि शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के बीच माहौल बिगाड़ने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से कथित तौर पर बाहरी तत्वों और पार्टी कार्यकर्ताओं को झारखंड भेजा गया। पार्टी का आरोप है कि इन लोगों को छात्रों के बीच शामिल कर आंदोलन को कमजोर करने और उसे हिंसक दिशा देने की कोशिश की गई।
झामुमो ने इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। हालांकि, बाहरी लोगों को भेजे जाने संबंधी इन आरोपों पर भाजपा का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस ने भी भाजपा को घेरा
विधानसभा घेराव के दौरान हुई हिंसा को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर हमला बोला है। रांची महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा ने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को राजनीतिक रूप देने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को आंदोलन में शामिल किया गया।
उन्होंने कहा कि विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस पर पथराव और वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आंदोलन को कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से उग्र बनाया गया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक मंच बनाने के प्रयास में प्रदर्शन का माहौल बिगड़ा और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
छात्रों के मुद्दे से ज्यादा अब सियासत पर नजर
रांची में हुए प्रदर्शन के बाद अब छात्र आंदोलन के मूल मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। सरकार जहां भाजपा पर आंदोलन को हाईजैक करने और कथित तौर पर बाहरी लोगों को शामिल कराने का आरोप लगा रही है, वहीं विधानसभा घेराव के दौरान हुई हिंसक घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
जेएसएससी सीजीएल परीक्षा समेत छात्रों की मांगों को लेकर पहले से चल रही नाराजगी के बीच विधानसभा घेराव की घटना ने सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के साथ छात्र संगठनों की अगली रणनीति पर भी नजर रहेगी।
झारखंड में छात्र आंदोलन बना सियासी मुद्दा
रांची का छात्र आंदोलन अब केवल परीक्षा और भर्ती से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। विधानसभा के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद सरकार, झामुमो, कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सत्ता पक्ष का दावा है कि छात्रों के मुद्दों पर बातचीत का रास्ता खुला था, जबकि राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण हालात बिगड़े।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या छात्र आंदोलन वास्तव में राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार हुआ या फिर प्रदर्शन के दौरान सामने आई हिंसा के पीछे अन्य कारण थे। सरकार और सत्तारूढ़ दलों के आरोपों के बीच भाजपा का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।



