झारखंड के विभिन्न जिलों में चरम पर है अवैध उत्खनन व कोयला लूट
निरसा विधानसभा में डंके की चोट पर जारी है अवैध कोयले का कारोबार कोल तस्करों के आगे नतमस्तक है कारवाई करनेवाले माननीय

झारखंड के विभिन्न जिलों में चरम पर है अवैध उत्खनन व कोयला लूट
निरसा विधानसभा में डंके की चोट पर जारी है अवैध
कोयले का कारोबार
कोल तस्करों के आगे नतमस्तक है कारवाई करनेवाले माननीय
निरसा : खादी व खाकी की मिलीभगत से झारखंड के विभिन्न जिलों में इनदिनों अवैध उत्खनन व कोयला लूट चरम पर है। सतारूढ़ दल व विपक्ष के खादीधारी कार्यकर्ता इसे बेखौफ रूप से अंजाम देने के लिए 24 घंटे जी जान से लगे है। कोयला तस्करी के एवज में कोल तस्करों द्वारा प्रतिमाह चढ़ाए जानेवाले चढ़ावे ने कारवाई करनेवाले कोल प्रबंधन, स्थानीय पुलिस व सीआईएसएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों को घृतराष्ट्र बना दिया है। हालात यह है कि झारखंड के विभिन्न जिलों में कोल तस्करी की गूंज अब तो दिल्ली तक पहुंच चुकी है। अभी हाल ही में जदयू सांसद खीरु महतो ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी झारखंड के विभिन्न जिलों में चल रही कोवला तस्करी से अवगत करा चुके है।

प्रधानमंत्री ने भी उन्हें कोल तस्करी पर सख्त कारवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि कोल तस्करी व अवैध कोयले कारोबार से अपना धनबाद जिला भी अछूता नहीं है। इसका नजारा धनबाद जिले के विभिन्न चौराहों से लेकर सड़कों पर खुलेआम देखा जा सकता है। झारखंड के विभिन्न जिलों में रात के अंधेरे से दिन के उजाले तक डंके की चोट पर कोयला लूट व तस्करी निर्वाध रूप से जारी है। साथ ही निरसा विधानसभा क्षेत्र का निरसा, चिरकुंडा, कालूबाथान, पंचैत, गलफरबाड़ी व क्षेत्र के दर्जनों रिफैक्ट्री व भट्टे भी चोरी के कोयले से गुलजार है।

कोल तस्करों के आगे कारवाई करनेवाली तमाम एजेंसियां नतमस्तक है। इन क्षेत्रों में कोल तस्कर बेखौफ होकर तस्करी के धंधे को अंजाम दे रहे है। पूछने पर स्थानीय थानेदार से लेकर विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी मिडिया के सवालों से कतराते नजर आ रहे है। ईसीएल का बंद खदान व अवैध उत्खनन स्थल कोल तस्करों का सेफ जोन बना हुआ है। वही ईसीएल के विभिन्न कोलियरियों के चालू ओसीपी में निर्वाध रूप से उत्पादित कोयले की लूट मची है।

कोल तस्करी के कारण ईसीएल व बीसीसीएल के अवैध उत्खनन स्थलों में चाल घंसने से कम समय में अधिक पैसे कमाने की लालच दर्जनों मजदूरों की मौत हो चुकी है परंतु कोल तस्करों पर इसका कोई नहीं पड़ता क्योंकि कोल तस्कर अवैध उत्खनन करवाने के लिए झारखंड व बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक पैसे का लालच देकर मजदूरों को लगा लेते है जिस कारण इनके साथ कोई अनहोनी या हादसा होने पर तस्कर से लेकर अधिकारी तक पाला झाड़ लेते है और मामला ठंढे बस्ते में दबकर रह जाता है। मान सम्मान के कारण स्थानीय लोग अवैध कोयला कारोबार का विरोध भी नहीं कर पाते है।

कारण है कि बात बात पर कोल तस्कर स्थानीय लोगों से गाली गलौज व मारपीट पर उतर जाते है क्योंकि कोल तस्करों को स्थानीय पुलिस व प्रशासन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कोल तस्करों के आगे जब सैंया मोर कोतवाल त अब डर काहे का वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। कोल तस्करी के सवाल पर निरसा थानेदार मिडिया को कहते है कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। आप इस संबंध में वरीय पदाधिकारियों से बात कर लें।


