ग्रामीणों की पहल से खड़ा हुआ स्कूल, विधायक जय राम महतो के सहयोग से 140 बच्चों की पढ़ाई जारी
शिक्षा की अलख जगाने के लिए जब ग्रामीण खुद आगे आते हैं, तो सीमित संसाधनों के बावजूद उम्मीदों की नई इबारत लिखी जा सकती है।

ग्रामीणों की पहल से खड़ा हुआ स्कूल, विधायक जय राम महतो के सहयोग से 140 बच्चों की पढ़ाई जारी
कुलगो गांव के ग्रामीण जनता उच्च विद्यालय में 6 शिक्षक संभाल रहे शिक्षा की जिम्मेदारी, निजी वेतन से शिक्षकों को मानदेय देते हैं विधायक जयराम महतो
गिरिडीह, मनोज कुमार।
डुमरी (गिरिडीह) : शिक्षा की अलख जगाने के लिए जब ग्रामीण खुद आगे आते हैं, तो सीमित संसाधनों के बावजूद उम्मीदों की नई इबारत लिखी जा सकती है। गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत कुलगो गांव स्थित ग्रामीण जनता उच्च विद्यालय इसकी एक मिसाल है। ग्रामीणों के आपसी सहयोग और अपने पैसे से स्थापित इस विद्यालय में आज 140 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय में छह शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिनके वेतन की व्यवस्था विधायक जयराम महतो अपने निजी वेतन से करते हैं।

विद्यालय की कहानी ग्रामीणों के शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाती है। गांव के लोगों ने बच्चों के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए खुद के पैसे से विद्यालय की स्थापना की थी, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूर न जाना पड़े और गांव के बच्चों को शिक्षा का बेहतर अवसर मिल सके।
हालांकि, कोरोना काल के बाद विद्यालय की स्थिति काफी खराब हो गई थी। संसाधनों की कमी और आर्थिक चुनौतियों के कारण पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा था। ऐसे समय में विधायक जयराम महतो का सहयोग विद्यालय के लिए सहारा बना। शिक्षकों के वेतन की व्यवस्था होने से बच्चों की पढ़ाई दोबारा सुचारु रूप से चलाने में मदद मिली।

विद्यालय के प्रिंसिपल अमित कुमार सिंह बताते हैं कि कोरोना काल के बाद स्कूल की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। आर्थिक परेशानियों के कारण विद्यालय का संचालन चुनौतीपूर्ण हो गया था। लेकिन विधायक जयराम महतो के सहयोग से अब बच्चे पढ़ाई कर पा रहे हैं और विद्यालय में शिक्षा का काम जारी है।
ग्रामीणों के सपनों को मिल रहा सहारा
कुलगो गांव का यह विद्यालय बताता है कि शिक्षा के लिए सामूहिक प्रयास कितने महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीणों ने अपनी मेहनत और आर्थिक सहयोग से विद्यालय की नींव रखी, वहीं विधायक के सहयोग से शिक्षकों के वेतन का इंतजाम हो रहा है।

140 बच्चों की पढ़ाई, छह शिक्षकों की मेहनत और ग्रामीणों की पहल—ये तीनों मिलकर उस उम्मीद को जिंदा रखे हुए हैं, जिसका सपना गांव के लोगों ने विद्यालय की स्थापना के समय देखा था। यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों के संकल्प की भी है, जो चाहते हैं कि आर्थिक चुनौतियां उनके बच्चों की शिक्षा के रास्ते में बाधा न बनें।




