गिरिडीह की बेटियां बनीं सशक्त: 304 प्रतिभागियों ने लाठी-तलवार से दिखाया आत्मरक्षा का दम
गिरिडीह शहर में इन दिनों एक सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है।

गिरिडीह की बेटियां बनीं सशक्त: 304 प्रतिभागियों ने लाठी-तलवार से दिखाया आत्मरक्षा का दम
गिरिडीह, मनोज कुमार।
गिरिडीह : गिरिडीह शहर में इन दिनों एक सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया में अधिक समय बिताने की आदी होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर की सैकड़ों बच्चियां इस ट्रेंड को तोड़ते हुए आत्मरक्षा और पारंपरिक शस्त्र कला की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

कुटुंब प्रबोधन के तहत माता अहिल्याबाई होलकर वाहिनी द्वारा आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में इस वर्ष कुल 304 बच्चियों, महिलाओं और युवतियों ने हिस्सा लिया। दस दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों ने टावर चौक के समीप सार्वजनिक प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया।

कार्यक्रम के दौरान बच्चियों ने लाठी और तलवार के हैरतअंगेज करतब दिखाए। अनुशासन, एकाग्रता और साहस का अद्भुत संगम देखने को मिला। मौके पर मौजूद बड़ी संख्या में दर्शकों ने हर प्रदर्शन पर तालियों की गूंज के साथ प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को न केवल लाठी और तलवार चलाने की तकनीक सिखाई गई,

बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनने, आत्मविश्वास बढ़ाने और विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की रक्षा करने के गुर भी सिखाए गए। प्रशिक्षकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण से बच्चियों में आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है और वे निडर होकर जीवन की चुनौतियों का सामना करना सीखती हैं।

कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने वाली पूनम बरनवाल ने बताया कि यह पहल पिछले चार वर्षों से लगातार जारी है। शुरुआत में जहां केवल 43 बच्चियां शामिल हुई थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 304 तक पहुंच गई है। यह समाज में बेटियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चियों को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे हर परिस्थिति में आत्मविश्वास के साथ खुद की रक्षा कर सकें और समाज में मजबूती से आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने घोषणा की कि अगले दिन सुबह स्थानीय अखाड़ा में भी बच्चियां अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगी, जहां शहरवासी इस अद्भुत प्रतिभा को और करीब से देख सकेंगे।

यह पहल यह साबित करती है कि यदि सही दिशा और अवसर मिले, तो आज की बेटियां न केवल आधुनिकता के साथ कदम मिलाकर चल सकती हैं, बल्कि अपनी परंपराओं और आत्मरक्षा की कला को भी उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ा सकती हैं।



