खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है : आईलेक्स प्राचार्य
खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है : आईलेक्स प्राचार्य

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है : आईलेक्स प्राचार्य
बरही : शोएब अख्तर
हजारीबाग/बरही :– पंचमाधव स्तिथ आईलेक्स पब्लिक स्कूल की मुख्य शाखा में स्वामी विवेकानंद की जयंती आयोजित की गई ।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक शैलेश कुमार ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर फूल अर्पित कर नमन किया। साथ हीं स्वामी विवेकानंद के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कलकत्ता के एक बंगाली कायस्थ परिवार में जन्मे विवेकानन्द आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीवों मे स्वयं परमात्मा का ही अस्तित्व हैं; इसलिए मानव जाति अथेअथ जो मनुष्य दूसरे जरूरतमन्दो की मदद करता है। साथ ही कहा कि भारत में विवेकानन्द को एक देशभक्त सन्यासी के रूप में माना जाता है और उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। वही स्कूल की छात्रा अकशा ने विवेकानंद जी के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर आत्मा ईश्वर से जुड़ी है, करना ये है कि हम इसकी दिव्यता को पहचाने अपने आप को अंदर या बाहर से सुधारकर। कर्म, पूजा, अंतर मन या जीवन दर्शन इनमें से किसी एक या सब से ऐसा किया जा सकता है। शैली ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी के यदि एक विचार का लेकर चले तो अपनी जिंदगी को संवार सकते है। साक्षी ने कहा कि जो कुछ भी तुमको कमजोर बनाता है – शारीरिक, बौद्धिक या मानसिक उसे जहर की तरह त्याग दो।

जिया ने कहा कि जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। विद्यालय के शैलेश कुमार ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए है आवश्यक है हम महापुरुषों के दिए विचारों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। कार्यक्रम में स्कूल के शिक्षक, शिक्षिकाएं व छात्र छात्राएं मौजूद थी।



