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आदिवासी भूरैयतों द्वारा मगध कोल प्रबंधन को भूमि नहीं देने से करोड़ों का हो रहा नुकसान ,जाने पूरी खबर 

आदिवासी भूरैयतों द्वारा मगध कोल प्रबंधन को भूमि नहीं देने से करोड़ों का हो रहा नुकसान ,जाने पूरी खबर 

*आउटसोर्सिंग कंपनी वीपीआर द्वारा कामगारों के निष्काषन से पनप रहा आक्रोश*

 

आदिवासी भूरैयतों द्वारा मगध कोल प्रबंधन को भूमि नहीं देने से करोड़ों का हो रहा नुकसान ,जाने पूरी खबर 

चतरा: ब्यूरो रिपोर्ट 

चतरा/टंडवा :एशिया के बड़े कोल परियोजनाओं में शुमार सीसीएल की मगध कोल परियोजना पर इन दिनों विस्तारीकरण को लेकर मंडरा रहे संकट के बादल और भी गहरा हो गया है।देवलगडा के आदिवासी भूरैयतों ने प्रबन्धन पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए अपनी जमीनों को देने से इंकार कर दिया जिससे देवलगडा पैच से कोल उत्पादन पिछले दस दिनों से ठप्प होने के साथ हीं मगध कोल प्रबंधन को लाखों-करोडों रुपए के हो रहे नुकसान से चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है।पवन उरांव,गंगवा उरांव, अभिषेक उरांव समेत अन्यों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से बंदोबस्त जमीन के बदले नौकरी व मुआवजा प्रबंधन द्वारा देने में टालमटोल किया जाता रहा है। बताया कि एक रणनीति के तहत हमारे उपजाऊ जमीनों को भारी धूल से बंजर कर प्रबंधन देने के लिए हमें बाध्य कर रहा है। वहीं विकास के मुद्दे पर बताया कि मुलभूत सुविधाओं के विकास का दावा सिर्फ ढोंग है। वर्षों से करोड़ों रुपए लाभार्जन के बावजूद सरकार और प्रबंधन द्वारा सौगात में हमसभी को वीरानगी,धूल-धूऐं का ज़हर के सिवा अबतक कुछ भी नहीं मिला है। लोगों ने दलालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें उलगुलान के लिए मजबूर ना किया जाए।

सीसीएल प्रबंधन व आउटसोर्सिंग कंपनी भूरैयतों के बीच बहाल करे विश्वास : बीस सूत्री अध्यक्ष सुभाष यादव

पिछले 10 दिनों से मगध के देवलगडा पैच से कोल उत्पादन बाधित होने के कारण करोड़ों के राजस्व का नुक़सान होना चिंतनीय है। प्रबंधन ग्रामीणों से विश्वास हासिल करने में नाकामयाब साबित हुई। सरकार स्थानीयों के विकास के लिए कंपनियों में 75% रोजगार सृजन के लिए प्रतिबद्ध है। जिसकी उपेक्षा करते हुए अनुपात से अधिक बाहरियों का कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आउटसोर्सिंग कंपनी के ‘यूज एंड थ्रो’ नीति शर्मनाक: पूर्व प्रमुख सीताराम

पूर्व प्रमुख ने कहा कि वीपीआर द्वारा अपनाए गए ‘नो वर्क नो पे’ से ढाई सौ मजदूरों पर संकट छा गया है। कंपनी के ‘यूज एंड थ्रो’ नीति के विरुद्ध आंदोलन की जाएगी।

आदिवासी भूरैयतों के अधिकारों का नहीं हो सकता हनन : दुर्गा सोरेन सेना

जानकारी के अनुसार अपको बताते चले की पार्टी के जिला महासचिव संतोष नायक ने मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी मजबूती के साथ बेवश परिवारों के साथ खड़ा है। कुछ माननीयों को प्रबंधन को हो रहे करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान की चिंता तो है पर आदिवासी गरीब परिवारों के जमीन, जीवन व जीविका पर पड़ रहे संकट में उनकी मूकदर्शी भूमिका सबके सामने है। खैर, पार्टी हर कीमत पर गरीब भूरैयतों के हक-अधिकारों की रक्षा करेगा।बगैर उनकी सहमति प्रबंधन एक इंच भी जमीन हासिल नहीं कर सकेगा।_

मजदूर हितों की मांग को लेकर प्रबंधन से मिलेंगे: मो.जहुर आलम

अपको बता दे की कोल यूनियन के क्षेत्रिय सचिव ने वीपीआर द्वारा मजदूरों के निष्काषन पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रबंधन से मिलकर हल निकालने की बातें कही।कहा, आउटसोर्सिंग कंपनी स्थानीय मजदूरों को सहयोग करते तत्कालिन जीविकोपार्जन हेतु सम्मानजनक राशि मुहैया कराए।

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