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आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी बनी है पानी की समस्या ,गाँव से दूर जाकर नदी में चुवां खोद कर भरते हैं पानी 

एक ही स्थान पर सुअर व अन्य जानवर तथा मनुष्य भी पीते हैं पानी 

 

गिरीडीह से  मनोज कुमार की रिपोर्ट 

आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी बनी है पानी की समस्या ,गाँव से दूर जाकर नदी में चुवां खोद कर भरते हैं पानी 

एक ही स्थान पर सुअर व अन्य जानवर तथा मनुष्य भी पीते हैं पानी 

नदी में पुल से वंचित है जोवड़िया बरसात महीने में गाँव तक ही सीमित रहते हैं लोग 

झारखंड/गिरिडीह : बिरनी प्रखण्ड अंतर्गत खेदवारा पंचायत के जोवड़िया आदिवासी गाँव में 75 वर्षों बाद भी बनी है पानी की समस्या । गाँव से दूर जाकर नदी में चुवां मारकर भरते हैं पानी । गर्मी व बरसात में भी भारी समस्याओं का करना पड़ता है सामना । दिनभर में 3-4 बार डेक्चा, व अन्य बर्तनों से माथे पर लेकर जाते हैं पानी । बता दें की ज़ब रफ्तार मिडिया की टीम ने बुधवार को जुवड़िया गाँव का अवलोकन किया गया जिसमें पानी को लेकर अनेकों समस्या पाई गई जिसमें देखा गया कि गाँव की सभी महिलाएँ बर्तन लेकर घर से दूर जाती है और नदी में पहले चुवां मरती है फिर एक-एक करके सभी अपने-अपने बर्तनों को भर्ती है । उन्होंने कहा प्रतिदिन यह काम करते हैं तथा रात में यदि घर मे पानी खत्म हो गया तो बिना पानी के ही रात गुजारना पड़ता है तथा बरसात में तो नदी का गन्दा पानी ही पीते हैं । बरसात के दिनों में तो कई बार बिना पानी के भी रहना पड़ता है । ग्रामीण सन्नी देवी ने बताया कि पूरे गाँव मे 1 ही कुँवा है जो दूर भी है और सभी लोग उससे पानी भी नही ले पाते हैं । उन्होंने कहा पिछले वर्ष भी लोग आए समस्या को सुनें फोटो खिंचवाये और चले गए न कहीं चापानल लगा न ही समस्या का समाधान ।

लालमणि देवी ने कहा चुनाव के समय विधायक,मुखिया,पंचायत समिति,जिला परिषद वोट लेने के लिए आते हैं बड़े-बड़े वादे करते हैं और गद्दी में बैठने के बाद यहाँ की समस्याओं को भूल जाते हैं । रूपा देवी ने कहा जब चुनाव आता है तभी हम आदिवासियों की याद आती है बाद में कोई पूछने तक नही आता है । बिरनी की अंतिम सीमा है जोवड़िया गाँव जो अब संसाधन विहीन है न ही चार पहिया वाहन जाने की साधन है ।

महालाल टुडू ने कहा जनप्रतिनिधि हो या अफसर सभी लोग अपने पेट सिर्फ दिखावा करते हैं कि हम जनता के सेवक हैं ।

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