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होली में मानवीय मूल्यों के प्रति रहें संवेदनशील

अमर्यादित व्यवहार से बचें, बेजुबान पशुओं को ना करें परेशान

होली में मानवीय मूल्यों के प्रति रहें संवेदनशील

अमर्यादित व्यवहार से बचें, बेजुबान पशुओं को ना करें परेशान

हजारीबाग: हिंदुस्तान की गंगा यमुनी सभ्यता का प्रतीक रंग व राग का लोकप्रिय पर्व होली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है जो जीवन में हर्ष एवं उल्लास का प्रतीक माना जाता है। यह अनेकता में एकता की हमारी संस्कृति को ओर मजबूत बनाने के लिए प्रेरित करता है। होली के इस पावन त्यौहार में पारस्परिक ईर्ष्या और द्वेष को भूलकर एक- दूसरे को गले से लगाते हैं और समाज में सहानुभूति और संवेदना का प्रचार करते हैं। लेकिन कई बार इस पवित्र त्यौहार में हम हुड़दंगई की हदें पार कर आपा खो बैठते हैं और असमाजिक कृत्य कर खुद को शर्मिंदा करते हैं। कई बार शराब के नशे में धुत होकर लोग अमर्यादित कार्य को अंजाम दे देते हैं तो कई बार हमारे आपसी मधुरतम रिश्ते में भी तकरार का कारण हम खुद बनते हैं। हुड़दंगई इतनी अधिक हो जाती है कि हम अपनी मानवीय संवेदना को भूल कर कई एक बार समाज में रहने वाले बेजुबान पशुओं को भी परेशान करने में पीछे नहीं रहते और उनके ऊपर रंगों की बौछार कर उनकी सुंदरता में कालिक पोतने का कार्य करते हैं।

ऐसे में हम सबों का यह कर्तव्य होना चाहिए कि होली जैसे शुभ पर्वों से शिक्षा ग्रहण करें और उत्सवों का आयोजन करके समाज में गौरव की वृद्धि करें। भेदभाव मिटाकर अपने जीवन में प्रेम और सद्भाव का रंग घोलें। एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प लें जहां समरसता और समावेशी विकास के रंग हर जिंदगी को खुशहाल बनाएं। मानव सभ्यता को अच्छुन्न रखते हुए हम बेजुबान पशुओं के साथ क्रुर या अमर्यादित व्यवहार ना करें और ना ही समाज में कोई असामाजिक कृत्य करें जिससे होली का यह पावन त्यौहार हमारे जिंदगी में फीका पड़ें।

रंगों के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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