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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, की ओर से व्यवहार न्यायालय, परिसर में किया गया वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, की ओर से व्यवहार न्यायालय, परिसर में किया गया वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, की ओर से व्यवहार न्यायालय, परिसर में किया गया वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम

गिरिडीह, मनोज कुमार।

गिरिडीह: माननीय झालसा, रांची के निर्देशानुसार विश्व पर्यावरण दिवस* का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार गिरिडीह की ओर से माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार गिरिडीह श्रीमती वीणा मिश्रा, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय गिरिडीह अरविंद कुमार पांडे एवं सभी न्यायिक पदाधिकारियों के कर कमलों द्वारा व्यवहार न्यायालय प्रांगण में वृक्षारोपण कर किया गया।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष , जिला विधिक सेवा प्राधिकार गिरिडीह श्रीमती वीणा मिश्रा ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना हम सभी लोगों का परम दायित्व है। पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए हम सभी को अधिक से अधिक संख्या में पेड़ पौधों को लगाना चाहिए साथ ही साथ वनों की अनावश्यक कटाई नहीं करनी चाहिए। आज औद्योगिकरण के इस दौर में मनुष्यों ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाई है, इसके परिणाम स्वरूप ग्लोबल वार्मिंग का खतरा पूरी पृथ्वी के ऊपर मंडरा रहा है एवं लगातार धरती के तापमान में वृद्धि हो रही है। इससे सभी प्राणियों के साथ-साथ मानव जीवन के ऊपर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। विगत वर्षों में कोविड-19 संक्रमण के काल में हम लोगों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण काफी लोगों को दम तोड़ते हुए देखा है। इन घटनाओं से हम सभी को सबक लेते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सजग होकर कार्य करने की आवश्यकता है। यदि हम लोग आज भी सचेत नहीं हुए तो आने वाले समय में इसके काफी गंभीर परिणाम हमारी आने वाली पीढ़ियों को उठाना पड़ेगा, इसलिए हम सभी लोगों का यह दायित्व है की पेड़ पौधों का संरक्षण करें एवं पर्यावरण को साफ सुथरा रखकर प्रदूषित होने से बचाएं।

कार्यक्रम को प्रधान न्यायधीश कुटुंब न्यायालय गिरिडीह अरविंद कुमार पांडेय ने भी संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा करने से ही हम सभी सुरक्षित रह सकते हैं। आज वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण इत्यादि विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से हमारी धरती आहत हो रही है। इस वजह से हम सभी के समक्ष भी जीवन संकट का खतरा उत्पन्न हो चुका है । अतः हम सभी लोगों को अभी से सचेत रहकर पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में कार्य करनी चाहिए, जिससे मानव प्रजाति की रक्षा हो सके।

सचिव महोदय, जिला विधिक सेवा प्राधिकार गिरिडीह, श्री सौरव कुमार गौतम ने पर्यावरण दिवस के इतिहास एवं इसकी महत्ता तथा उपयोगिता को बताते हुए कहा कि यह पृथ्वी हमें प्रकृति के द्वारा दिया गया अनुपम उपहार है एवं इसको अनंत काल तक संरक्षित करके रखना हम सभी लोगों का परम कर्तव्य है। मनुष्यों की दैनिक उपयोगिताएं एवं आधुनिकीकरण के इस अंधी दौड़ में हम सभी लोगों ने प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ कर रख दिया है, परिणाम स्वरूप हमारी धरती के तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है। इससे मौसम में भी काफी बदलाव हो रहा है। कहीं अतिवृष्टि तो कहीं अनावृष्टि जैसी समस्याओं से भी निरंतर सामना करना पड़ रहा है। हमारी धरती का जलस्तर भी निरंतर नीचे गिरता जा रहा है जिसकी वजह से हम सभी लोगों के जीवन के ऊपर एक गंभीर संकट उत्पन्न होने की स्थिति आ चुकी है। यदि हम लोग समय रहते सचेत नहीं हुए तथा इस प्रकृति को संरक्षित रखने की दिशा में पूरे लगन से और सामूहिक रूप से काम नहीं किए तो वह दिन दूर नहीं कि जब इस धरती से अन्य प्राणियों के साथ साथ मानव प्रजाति भी विलुप्त होने के कगार पर आ जाएंगे।

उन्होंने सभी पारा लीगल वॉलिंटियर्स को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में आज के दिन पेड़-पौधों को लगाकर इस महोत्सव को मनाएं, तथा आम लोगों को भी अधिक से अधिक संख्या में पेड़ पौधों को लगाने एवं उसे सुरक्षित करने हेतु प्रेरित करें।

इस प्रकृति का कर्ज़ हम सभी के ऊपर है और हम सभी लोग अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाकर ही अपने इस प्राकृतिक कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने ठोस अवशिष्ट (कचरा) प्रबंधन नियमावली-2016 के विभिन्न प्रावधानों के ऊपर चर्चा करते हुए कहा कि हम सभी लोगों को इस कानून के अनुसार अपने घरों से निकलने वाले कचरे को भी गीले कचरे एवं सूखे कचरे के रूप में शुरुआती दौर में ही अलग अलग कर उसका सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए। प्लास्टिक एवं उन से बने हुए अन्य उत्पादों का उपयोग कम से कम मात्रा में करना चाहिए तथा उन्हें नालियों, खुले मैदानों, नदियों, तालाबों एवं अन्य जल स्रोतों में नहीं फेंकना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह इस कानून के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इस कानून में फैक्ट्रियों, संस्थाओं, कार्यालयों एवं घरों से निकलने वाले कचरों के उचित निपटान का प्रावधान किया गया है। जिसका पालन हम सभी लोगों को एक सभ्य नागरिक के तौर पर करना चाहिए ताकि पर्यावरण को संरक्षित करने की दिशा में पहल हो सके। यदि कोई फैक्ट्री अथवा संस्था उनके यहां से निकलने वाले कचरे को खुले में छोड़ता है या जल स्रोतों, नदियों, तालाबों, झीलों इत्यादि में इसे फेंकता है तो इसकी सूचना तत्काल ही सरकार के एजेंसियों तक पहुंचानी चाहिए ताकि उनके ऊपर दंडात्मक कार्यवाही किया जा सके।

उन्होंने तमाम बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील किया कि सभी लोग अपने स्तर से निरंतर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लोगों को जागरूक करें, क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण का कार्य सिर्फ सरकार अथवा कोई संस्था नहीं कर सकती है बल्कि यह जनभागीदारी का विषय है जिसमें सभी लोगों को मिलजुलकर पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में सच्चे मन से कार्य करने की आवश्यकता है, तभी हम अपने इस पृथ्वी को आने वाली पीढ़ियों के लिए रहने योग्य बना कर रख सकते हैं।

इस कार्यक्रम में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रथम, गोपाल पांडेय, जिला एवं सत्र न्यायधीश अष्टम यशवंत प्रकाश, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वितीय आनंद प्रकाश, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय गिरिडीह से अजय कुमार श्रीवास्तव, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तृतीय सोमेंद्र नाथ सिकदर, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चतुर्थ पीयूष श्रीवास्तव, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गिरिडीह लक्ष्मीकांत, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गिरिडीह अशोक कुमार, न्यायाधीश प्रभारी गिरिडीह आशीष अग्रवाल सहित गिरिडीह न्याय मंडल के सभी न्यायिक पदाधिकारीगण, वन विभाग के पदाधिकारी, विद्वान पैनल अधिवक्तागण, सभी विद्वान मध्यस्थ, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के सभी विद्वान अधिवक्तागण की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को सफल बनाने में व्यवहार न्यायालय गिरिडीह के कर्मचारी प्रभाकर कुमार सिंह, राजेश कुमार, प्राणेश अजीत, नवनीत कुमार दाराद, ताबिश जहूर सहित पारा लीगल वालंटियर्स दिलीप कुमार, अशोक कुमार वर्मा, शालिनी प्रिया, शसंतोष कुमार, अनवारूल हक तथा अन्य न्यायालय कर्मियों एवं वन विभाग के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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