मैथन के रास्ते बंगाल से दिल्ली जारी है करोड़ो की प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली की तस्करी का खेल
तस्करों के आगे जिला प्रशासन व मत्स्य विभाग फेल

मैथन के रास्ते बंगाल से दिल्ली जारी है करोड़ो की प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली की तस्करी का खेल
तस्करों के आगे जिला प्रशासन व मत्स्य विभाग फेल
निरसा धनबाद : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और भारत सरकार के प्रतिबंध के बावजूद पिकअप वैन के माध्यम से फर्जी चालान के सहारे पश्चिम बंगाल के कोलकाता से मैथन के रास्ते निरसा,गोविंदपुर होते हुए प्रतिदिन झारखंड, बिहार, यूपी, दिल्ली, हरियाणा सहित भारत के अन्य राज्यों में प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली का करोड़ों की तस्करी निर्बाध रूप से जारी है । सूत्र बताते है कि इस तस्करी के खेल में बंगाल के कारोबारी श्यामल कुडु, कोची दा, डीएस, हाजी, गोपाल घोष, गोपाल मिस्त्री, हीरो दा, गौर सरकार, सज्जाद अंसारी, नूर आलम, कालू दा, छोटका दा, देवा, राजू मास्टर, अमीनूर आलम, टून्ना, कासिम, अमर मंडल, ननकू, आजाद खान, अब्दुल्ला समेत कई कारोबारी शामिल है । वही इन प्रतिबंधित मछलियों के पासिंग में एस पी रोड लाइन्स के गया निवासी महेन्द्र साहनी शामिल है जो दिल्ली से कोलकाता कचड़ा सप्लाई करता है और वापसी में प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली की सप्लाई करता है । राकेश,चंदन व मुकेश भी एस पी रोड लाइन्स नामक फर्जी चालान के साथ जुड़ा हुआ है । वही निमियाघाट का राकेश गुप्ता भी प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली के धंधे में शामिल है । वही मैथन में विपुल, मुकेश, चंदन, अमन सादा मछली के साथ साथ प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली के तस्करी के धंधे की भी देखरेख करता है । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लक्ष्मी लोजेस्टिक एवं हारतिक लोजेस्टिक बिल्टी के माध्यम से मछली का कारोबार होता है । लक्ष्मी लोजेस्टिक में सादा मछली का कारोबार होता है जबकि हारतिक लोजेस्टिक बिल्टी में सादा के अंदर प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली का भी कारोबार होता है । बताया जाता है कि रोशन वर्णवाल पूर्व में इस धंधे में शामिल था । इस सिंडिकेट ने पहले रोशन को पार्टनर बनाया था फिर धीरे धीरे उसे हटा डाला । इसकी तस्करी कर तस्कर खुलेआम आमजनों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है । विशेषज्ञों का कहना है कि थाई मांगूर मछली का सेवन कर आमलोग कैंसर समेत कई गंभीर रोगों के चपेट में आ जाते है । जिला प्रशासन के नाक के नीचे खुलेआम इस तरीके से तस्करी कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और केंद्र सरकार के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही है । वही इस पर अंकुश लगाने के बजाए जिला प्रशासन व मत्स्य विभाग कुंभकर्णी निंद्रा में सोया हुआ है । ऐसे में इनकी सहभागिता से इंकार नहीं किया जा सकता है । ज्ञात हो कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और भारत सरकार ने वर्ष 2000 में विदेशी थाई मछली पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद खुलेआम थाई मछली बेची और खरीदी जा रही है। सूत्र बताते है कि इस तस्करी के इनदिनों बंगाल के दर्जनों कारोबारी समेत झारखंड, बिहार, यूपी, दिल्ली समेत भारत के कई राज्यों में तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है । मैथन में मैथन, मैथन मोड़, कुमारधुबी, चिरकुंडा, पंचेत आदि क्षेत्रों के दर्जनों तस्कर शामिल है । शाम होते ही मैथन ओपी क्षेत्र के एक चर्चित होटल पर तस्करों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है । प्रतिबंधित थाई मांगूर मछली का वाहन पहुंचने लगता है । उक्त स्थल से फर्जी चालान के माध्यम से तस्करी का खेल 7 बजे शाम से शुरू हो जाता है जो देर रात तक शुरू रहता है । वही सूत्रों का कहना है कि इस धंधे के एवज में प्रतिमाह कारोबारियों व तस्करों द्वारा स्थानीय पुलिस से लेकर जिला के वरीय पदाधिकारियों को मोटी रकम का चढ़ावा चढ़ाया जाता है जिसके कारण स्थानीय पुलिस चुप रहने में ही अपनी भलाई समझती है । ऐसे में कैसे रुकेगा प्रतिबंधित थाई मछली की तस्करी का खेल । यह बात इनदिनों आमलोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है ।



