नाइजर में अपहृत गिरिडीह के श्रमिकों की अब तक सकुशल रिहाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.
नाइजर में अपहृत गिरिडीह के श्रमिकों की अब तक सकुशल रिहाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.

नाइजर में अपहृत गिरिडीह के श्रमिकों की अब तक सकुशल रिहाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है.
गिरिडीह, मनोज कुमार
गिरिडीह: पश्चिमी अफ्रीका के नाइजर में तकरीबन दो महीने से अपहृत बगोदर के पांच प्रवासी श्रमिकों की रिहाई नहीं हो सकी है. श्रमिकों की रिहाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. लोग आंदोलन कर रहे हैं और अब क्षेत्र की सांसद सह केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के आवास का घेराव करने का निर्णय लिया गया है.
महिलाएं केंद्रीय मंत्री के आवास का घेराव करेंगी. इसका निर्णय अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने लिया है. 22 जून को कोडरमा सांसद सह महिला एवं केंद्रीय बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के आवास का घेराव किया जाएगा. आवास घेरने महिलाएं जाएंगी. इसे लेकर गुरुवार को बगोदर के कुदर, बखरीडीह, तुकतुको और दोनदलो में ग्राम सभा की गई. गुरुवार को मौसम खराब रहने के बावजूद ग्राम सभा में भारी भीड़ उमड़ी. यहां बगोदर के पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह, माले प्रखंड सचिव परमेश्वर महतो, जिप सदस्य सरिता महतो, उप प्रमुख हरेंद्र कुमार सिंह, शेख बदरुद्दीन, तेजनारायण पासवान ,राजेश मंडल समेत अन्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह ने कहा कि बगोदर के दोनदलो के चार और मुंडरो के एक प्रवासी मजदूर का अपहरण पश्चिमी अफ्रीका के नाइजर में तकरीबन दो महीने पूर्व कर लिया गया था. अपहरण के बाद उनकी सकुशल रिहाई के लिए भारत सरकार की तरफ से कोई कोशिश नहीं की जा रही है. इससे पीड़ित परिजनों और ग्रामीणों में रोष व्याप्त है. उन्होंने कहा कि पहलगाम की आतंकी घटना के बाद मोदी सरकार पूरी दुनिया में सांसदों की टीम भेजती है, पर मजदूरों की रिहाई के लिए पांच सांसदों की कोई टीम सरकार नाइजर नहीं भेजती है. इससे पता चलता है कि प्रवासी मजदूरों की सरकार के नजर में कोई कीमत नहीं है.
पूर्व विधायक ने कहा कि कोडरमा की सांसद और भारत सरकार में मंत्री अन्नपूर्णा देवी अपहृत मजदूरों की रिहाई के लिए कोई कोशिश नहीं कर रही हैं. पीड़ित परिवार का दुःख एक संवेदनशील जनप्रतिनिधि के तौर पर क्यों नहीं बांटना चाहती हैं, यह बात पूछने के लिए आगामी 22 जून को समूचे कोडरमा क्षेत्र से हजारों महिलाएं सांसद के आवास पहुंचेंगी.
कार्यक्रम में प्रखंड सचिव परमेश्वर महतो ने कहा कि 1989 में जब केंद्रीय मंत्री की बेटी का जब अपहरण हुआ था तो देश की सुरक्षा को दांव पर रखकर खूंखार आतंकवादियों को रिहा कर दिया गया था. पर जब प्रवासी और गरीब मजदूरों का अपहरण होता है तो यह भारत सरकार के लिए महत्वहीन है. उन्होंने कहा कि आगामी 22 जून को हजारों हजार महिलाएं कोडरमा पहुंच रही हैं और पूछेंगी कि हमारे सिंदूर की कोई कीमत नहीं है क्या और यदि हमारे सिंदूर की कीमत है तो लोकप्रिय महिला सांसद की जुबान दिल्ली में क्यों नहीं खुलती है. ग्राम सभा में कई ग्रामीण लोग शामिल थे.




