अवैध वसूली’ पर सांसद मनीष जायसवाल की सख्ती: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हड़कंप, सुपरीटेंडेंट ने जारी किया सख्त आदेश
हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों से मनमानी अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

अवैध वसूली’ पर सांसद मनीष जायसवाल की सख्ती: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हड़कंप, सुपरीटेंडेंट ने जारी किया सख्त आदेश
हजारीबाग: कुंवर यादव ब्यूरो रिपोर्ट
हजारीबाग : हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों से मनमानी अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। डिस्चार्ज और भर्ती स्लिप (आईपीडी) के शुल्क में की जा रही धांधली को हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने गंभीरता से लिया। उनकी ओर से मामला उठाए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन तत्काल एक्शन मोड में आ गया है।

शिकायत के अनुसार अस्पताल के अधिकांश वार्डों में मरीजों को डिस्चार्ज किए जाने के एवज में उनसे 100 रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। यह वसूली नकद के साथ-साथ फोन- पे जैसे डिजिटल माध्यमों से भी की जा रही थी, जिससे गरीब और सामान्य मरीज़ों को भारी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही थी।

इतना ही नहीं अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए निर्धारित आईपीडी स्लिप का शुल्क नियमानुसार 15 रुपए होने के बावजूद कथित तौर पर मरीजों से 20 रुपए वसूले जा रहे थे, जो सीधे तौर पर सरकारी नियमों का उल्लंघन है।
सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर उनके हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के मीडिया प्रतिनिधि श्री रंजन चौधरी ने इस गंभीर मामले को उठाते हुए प्रभारी सुप्रिटेंडेंट डॉ. राजकिशोर को पूरे मामले से अवगत कराया।
रंजन चौधरी ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही चरम पर है और कर्मचारी इसका फायदा उठाकर मरीजों की संवेदनाओं से अधिक अपनी कमाई की चिंता करते हैं। उन्होंने तत्काल अवैध वसूली पर रोक लगाने, मामले की गहन जांच करने और दोषी कर्मियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
सांसद मनीष जायसवाल ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि जनता से वसूली किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सांसद मनीष जायसवाल द्वारा मामला उठाए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया। शनिवार को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रभारी सुपरीटेंडेंट डॉ. राजकिशोर ने अधीक्षक कार्यालय के द्वारा तत्काल प्रभाव से एक आदेश निर्गत कर दिया।
आदेश पत्र में उन्होंने सभी विभागाध्यक्ष, मेट्रोन एवं सभी वार्डों के इंचार्ज को निर्देशित किया कि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं की जाए, अन्यथा संबंधित के विरुद्ध नियमानुकूल कार्रवाई की जाएगी। अधीक्षक कार्यालय से निकले आदेश में लिखा गया है कि प्रायः शिकायत पाई जाती है कि वार्ड में कार्यरत नर्सेस या वार्ड ब्वॉय के द्वारा भर्ती मरीज के डिस्चार्ज के समय पैसे की मांग की जाती है और नहीं देने पर डिस्चार्ज स्लिप मरीज को नहीं दिया जाता है जो काफी खेदनजक विषय है।


