डॉक्टर-इंजीनियर बनना बड़ी बात नहीं, संस्कारवान बनना है असली सफलता: इंदु देवी
पद और प्रतिष्ठा से बढ़कर हैं संस्कार, संस्कारवान व्यक्ति ही समाज और देश का सच्चा निर्माता होता है।

डॉक्टर-इंजीनियर बनना बड़ी बात नहीं, संस्कारवान बनना है असली सफलता: इंदु देवी
गिरिडीह : मनोज कुमार।
गिरिडीह : पद और प्रतिष्ठा से बढ़कर हैं संस्कार, संस्कारवान व्यक्ति ही समाज और देश का सच्चा निर्माता होता है। इसी संदेश के साथ सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में आयोजित वंदना सभा में अभिभाविका इंदु देवी ने विद्यार्थियों को जीवन में संस्कारों का महत्व समझाया।

विद्यालय में 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित वंदना सभा में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं इंदु देवी और आचार्या सरिता कुमारी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्पार्चन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद भैया-बहनों ने सामूहिक वंदना प्रस्तुत की।
इस अवसर पर वरिष्ठ आचार्या सरिता दीदी ने मुख्य अतिथि का आत्मीय परिचय कराते हुए उनका अभिनंदन किया। वहीं, आचार्या मेनका दीदी ने अंगवस्त्र प्रदान कर इंदु देवी को सम्मानित किया।

अपने संबोधन में इंदु देवी ने कहा कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर आकर उनका हृदय प्रसन्न हो गया। वह लंबे समय से इस विद्यालय की शैक्षणिक और संस्कारपरक गतिविधियों से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां चारों ओर भागदौड़ और तनाव का माहौल है, वहीं इस विद्यालय के बच्चे प्रतिदिन वंदना सभा में शांत चित्त से ध्यान लगाते हैं। यह विद्यालय की बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आप भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर और बड़े अधिकारी जरूर बनें, लेकिन हमेशा याद रखें कि पद से बड़ा संस्कार होता है। संस्कारवान व्यक्ति ही समाज और देश के निर्माण में सच्चा योगदान दे सकता है।
इंदु देवी के प्रेरणादायक विचारों का उपस्थित आचार्य-आचार्याओं और बहनों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ आचार्या सरिता दीदी ने मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया।
विद्यालय की इस वंदना सभा ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि जीवन में ऊंचा पद हासिल करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अच्छे संस्कार, अनुशासन और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ना ही सच्ची सफलता है।



