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नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय में ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ

नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर, पलामू (झारखंड) तथा *भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली* के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी *“भारतीय भाषा परिवार : भारतीय भाषाओं में एकात्मता”* का प्रथम दिवस आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित *शैक्षणिक भवन, व्यावसायिक अध्ययन संस्थान* में अत्यंत गरिमामय एवं सफल वातावरण में संपन्न हुआ।

नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय में ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषयक द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ

पलामू : नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर, पलामू (झारखंड) तथा *भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली* के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी *“भारतीय भाषा परिवार : भारतीय भाषाओं में एकात्मता”* का प्रथम दिवस आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित *शैक्षणिक भवन, व्यावसायिक अध्ययन संस्थान* में अत्यंत गरिमामय एवं सफल वातावरण में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न भागों से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं भाषा-प्रेमियों की सक्रिय सहभागिता से विश्वविद्यालय परिसर में एक सशक्त अकादमिक वातावरण देखने को मिला।

प्रथम दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः *9 बजे से 10 बजे तक पंजीकरण प्रक्रिया* के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में पंजीकृत प्रतिभागियों ने सहभागिता दर्ज कराई। इसके पश्चात उद्घाटन सत्र का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के *मुख्य संरक्षक* नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति *प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह* एवं *सह-संरक्षक* विश्वविद्यालय के कुलसचिव *प्रो. (डॉ.) नफ़ीस अहमद* हैं। संगोष्ठी का संयोजन *डॉ. विनीता दीक्षित, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग (पीजी संकाय, नीलांबर–पीतांबर विश्वविद्यालय) द्वारा किया जा रहा है, जबकि **डॉ. विभा शंकर*, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, जी.एल.ए. कॉलेज, इस आयोजन के समन्वयक हैं।

“भाषा की एकता में निहित है राष्ट्र की एकता : नामधारी जी” उद्घाटन सत्र में *मुख्य अतिथि, झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष **श्री इंदर सिंह नामधारी* ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और राष्ट्रीय पहचान की आत्मा हैं। उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता में अंतर्निहित एकता को भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताया। नामधारी जी ने अपने संबोधन में कहा कि भाषा की एकता में ही देश की एकता निहित है। उन्होंने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन से अमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार इस संगोष्ठी के गहन विमर्श से भी ज्ञान, विचार और सांस्कृतिक चेतना के बहुमूल्य रत्न निकलेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह आयोजन भारतीय भाषाओं की एकात्मता को और अधिक सुदृढ़ करेगा।

कार्यक्रम के *बीज वक्ता* प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने “भारतीय भाषा परिवार” की अवधारणा को भाषावैज्ञानिक आनुवंशिकी के दृष्टिकोण से स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच ऐतिहासिक, संरचनात्मक और सांस्कृतिक संबंध अत्यंत गहरे हैं, जिन्हें औपनिवेशिक वर्गीकरणों के कारण लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने स्वदेशी भाषाई दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके अतिरिक्त *डॉ. हितेंद्र कुमार मिश्रा* सहित अन्य आमंत्रित विद्वानों ने भाषाविज्ञान, संस्कृति, शिक्षा, अनुवाद अध्ययन एवं बहुभाषिकता जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

प्रथम दिवस का विशेष आकर्षण *भारतीय भाषा समिति द्वारा रचित एवं नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित* दो महत्वपूर्ण पुस्तकों — Bharatiya Bhasha Pariwar: A New Framework in Linguistics तथा Collected Studies on Bharatiya Bhasha Pariwar: Perspectives and Horizons — का विधिवत लोकार्पण रहा। इन पुस्तकों को भारतीय भाषाविज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है।

संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए शोधार्थियों एवं युवा शिक्षकों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इन शोध-पत्रों में भारतीय भाषाओं की संरचनात्मक समानताओं, शब्दावली, व्याकरणिक विशेषताओं तथा सांस्कृतिक तत्वों पर गहन एवं सार्थक विमर्श किया गया, जिसे प्रतिभागियों द्वारा अत्यंत सराहा गया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति *प्रो. (डॉ.) दिनेश कुमार सिंह* ने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ विश्वविद्यालयों में अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ *भाषा, समाज और राष्ट्रीय एकता* के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी से निकले निष्कर्ष भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

इस अवसर पर कार्यक्रम में *छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) डॉ. एस. के. पांडेय, सीसीडीसी डॉ. मनोरमा सिंह, नामधारी महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मोहिनी गुप्ता*, विश्वविद्यालय के सभी घटक एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, सभी संकायों के संकायाध्यक्ष तथा स्नातकोत्तर विभागों के सभी विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक बढ़ाया। प्रथम दिवस की चर्चाओं एवं संवादों ने प्रतिभागियों को अत्यंत प्रेरित किया और द्वितीय दिवस के सत्रों के लिए उत्साह का संचार किया।

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