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दस लाख का इनामी नक्सली सुरेश मुंडा समेत दो नक्सलियों ने मंगलवार को झारखंड पुलिस के समक्ष किया सरेंडर।

दस लाख का इनामी नक्सली सुरेश मुंडा समेत दो नक्सलियों ने मंगलवार को झारखंड पुलिस के समक्ष किया सरेंडर।

झारखण्ड: दस लाख का इनामी नक्सली सुरेश मुंडा समेत दो नक्सलियों ने मंगलवार को झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. रांची जोनल आईजी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर दस लाख इनामी सुरेश मंडा और दो लाख का इनामी लोदरो मुंडा ने आईजी अभियान, रांची जोनल आईजी, डीआईजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर कर दिया l सुरेश मुंडा रांची के बुंडू थाना अंतर्गत बाराहातू का रहनेवाला है. सुरेश सिंह मुंडा पर 67 मामले दर्ज हैं. सुरेश मुंडा को छह वर्ष के उम्र में साल 1997- 98 में कुंदन पाहन का दस्ता उसे माओवादी दस्ता में शामिल करने के लिए लेकर चला गया थाl

फरवरी 2021 में पोड़ाहाट में भाकपा माओवादी के सक्रिय जोनल कमांडर जीवन कांडूलना द्वारा रांची पुलिस के समक्ष सरेंडर करने के बार, सुरेश मुंडा और लोदरो मुंडा को पोड़ाहाट भेजा गया था. पुलिस के लगातार अभियान, बढ़ती दबिश और संगठन के आंतरिक शोषण से तंग आकर, झारखंड पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया. सुरेश मुंडा पिछले 25 वर्षो से भाकपा माओवादी संगठन में सक्रिय था l

लोदरो मुंडा पर 54 मामले दर्ज है. लोदरो मुंडा अपने घर पर रहकर ट्रैक्टर चलाने का काम करता था. लोदरो मुंडा की पुलिस से अच्छी जान पहचान थी. साल 2009 में कुंदन पाहन को इस बात की जानकारी मिली, तो उसने पुलिस की मुखबिरी नहीं करने की चेतावनी दी,इसी दौरान मेहनत उर्फ मोछू का दस्ता लोदरो मुंडा के गांव आया और साल 2010 में लोदरो मुंडा माओवादी संगठन से जुड़ गया.

पिछले दिनों चार जनवरी को मनोहरपुर के पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमले में सुरेश सिंह मुंडा भी शामिल था. नक्सलियों ने विधायक के सुरक्षा दस्ते में तैनात दो जवानों की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी थी. एक जवान जान बचाकर भागने में सफल रहा. नक्सली हमले में गुरुचरण नायक किसी तरह ग्रामीणों के सहयोग से भाग कर जान बचाने में सफल रहेl चक्रधरपुर में कोबरा बटालियन पर हमला करने के मामले में भी सुरेश सिंह मुंडा शामिल था. सुरेश सिंह मुंडा का भाई प्रभात सिंह मुंडा उर्फ मुखिया भी नक्सली दस्ते में शामिल है. वह बुंडू व रांची क्षेत्र में नक्सली दस्ते के साथ रहकर वारदात को अंजाम देता है. सुरेश सिंह मुंडा व लोदरो लोहार से पुलिस को कई अहम जानकारी मिली है l

आपको बता दे की झारखण्ड सरकार के द्वारा चलाएं जा रहा अभियान और झारखंड पुलिस, प्रशासन के अथक प्रयास से झारखंड में लगातार कई नक्सलीओ को सरेंडर करने में कामयाबी हासिल किया है। सभी नक्सलि अपने से अगर सरेंडर करते है तो झारखण्ड पुलिस के द्वारा उसे सम्मानित भी किया जाता हैं और झारखंड पुलिस का कहना है की गलत करने वाला व्यक्ति गलत ही होता है । पुलिस का प्रयास है की झारखंड नक्सल मुक्त हो ।

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