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जीवित्पुत्रिका में अपने पुत्र एवं पुत्री के लिए महिलाएं रखती हैं 24 घंटे का निर्जला उपवास : आचार्य प्रियरंजन

अपने पुत्र एवं पुत्री के लिए जीवित्पुत्रिका जो आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है ।

जीवित्पुत्रिका में अपने पुत्र एवं पुत्री के लिए महिलाएं रखती हैं 24 घंटे का निर्जला उपवास : आचार्य प्रियरंजन

अपने पुत्र एवं पुत्री के लिए जीवित्पुत्रिका जो आश्विन मास के कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को मनाया जाता है । जीवित्पुत्रिका में महिलाएं 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर पूजन करती हैं और अपने पुत्र तथा पुत्री के दीर्घायु होने की कामना करती है। यह परंपरा हजारों वर्षों से चलते आ रही है। महिलाएं अपने बच्चों के लिए जिस तरह का उपवास करती हैं वह शायद सभी के लिए भी संभव नहीं है ।

आज अष्टमी तिथि के दिन निर्जला उपवास रखकर भक्ति भाव से महिलाएं पूजन करती हैं और नवमी में पारण करते हैं । ऐसा मत है कि ऐसा करने से उनके पुत्र एवं पुत्री की आयु बढ़ती है और वह दीर्घायु होते हैं।

उक्त बातें आचार्य प्रियरंजन पाठक ने कही । वे एक यजमान के यहां पूजन करा रहे थे । श्री पाठक राष्ट्रीय सेवा मंच के केंद्रीय अध्यक्ष हैं, रिसर्च एंट्री करप्शन एंड क्राइम इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं साथ ही साथ द जर्नलिस्ट संगठन के महासचिव हैं एवं अन्य कई संगठनों से भी जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जिस कूल में वह जन्म लिए हैं वह कर्म भी उन्हें करने में अच्छा लगता है और वह पूजा पाठ भी कराते हैं।

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